Saturday, 24 October 2015

आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाय

आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाये l बचपन की उन शरारतों को फिर से हम दोहरायेll अपनी सारी चिन्ताओ को दूर कही छोड़ आये l आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाये ll भिनी-भिनी मिट्टी की खुश्बू चखने को है बुलाती l डंडा लेकर दौड़ती माँ हमे याद बहुत है आती ll फिर से चूल्ले की रोटी और लोनी घी खाये l आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाये ll आज के विडियो गेम वो मजा ना दे पाये l गिल्ली डंडा, खो-खो खेल खूब मजे आये ll गाँव के पोखर में जाकर मजे से डुबकी लगाये l आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाये ll भारी-भारी इन बेगो को कंधे ना अब उठाये l फिर से एक बार तख्ती ले स्कूल हम जाये ll बैल गाड़ी की सवारी कर, धुएं से बच जाये l आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाये ll बारिश के आने पर आँगन में फिर हम नहाये l कागज़ की हम नांव बनाकर हम खूब चलाये ll छत पर चढ़कर मोर का हम नाच देख आये l आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाये ll मदारी के इशारे पर बंदर का नाच नाचना l वहीं भालू मामा का भी खूब फुदकते जाना ll फिर से अपने गाँव में सर्कस का शो चल जाये l आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाये ll ठंडी-ठंडी कुल्फी वाला जब भी घंटी बजाये l सफ़ेद नीले रंग वाला बक्सा खूब याद आये ll कुल्फी का मजा लिए बिना कोई ना रह पाये l आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाये ll अंधकार के बड़ते ही छत पर सोने जाये l सोच-सोच कर गगन में तारो से फोटो बनाये ll माँ की प्यारी गोद में लोरी सुनकर सो जाये l आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाये ll उस दुनिया में चिंता ना, कभी किसी सो सताये l ईर्ष्या और बैर कभी ना पास किसी के आये ll बहार से चाबी लगा के हम वहीं  जाये  आओ चलो एक बार फिर बचपन में खो जाये ll

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